तलाश पहल (TALASH Initiative)
तलाश पहल (Tribal Aptitude, Life Skills, and Self-Esteem Hub) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है, जो जनजातीय छात्रों के समग्र विकास पर केंद्रित है। यह राष्ट्रीय शिक्षा सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) द्वारा मंत्रालय ऑफ ट्राइबल अफेयर्स के तहत और यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से जुलाई 2025 में लॉन्च की गई। इसका मुख्य उद्देश्य एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में पढ़ने वाले जनजातीय छात्रों को शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और जीवन कौशल प्रदान करना है, ताकि वे आत्मविश्वास और स्वावलंबन के साथ मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
मुख्य उद्देश्य
- आत्म-जागरूकता और कौशल विकास: छात्रों की रुचि, क्षमता और व्यक्तित्व का मूल्यांकन कर उन्हें जीवन कौशल (जैसे समस्या समाधान, संचार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता) सिखाना।
- करियर स्पष्टता: भविष्य के करियर विकल्पों पर मार्गदर्शन, ताकि छात्र अपनी क्षमताओं के अनुरूप पथ चुन सकें।
- समावेशी शिक्षा: दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले 1.38 लाख से अधिक जनजातीय छात्रों (28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में EMRSों में) को गुणवत्तापूर्ण संसाधनों की पहुंच प्रदान करना।
- आत्म-सम्मान बढ़ावा: NCERT की 'तमन्ना' पहल से प्रेरित, यह छात्रों में आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| डिजिटल प्लेटफॉर्म | ऑनलाइन टूल्स के माध्यम से साइकोमेट्रिक टेस्ट, करियर काउंसलिंग, लाइफ स्किल्स मॉड्यूल और सेल्फ-एस्टिम वर्कशॉप। |
| फेज्ड रोलआउट | जुलाई 2025 में शहर-स्तरीय पायलट से शुरू, दिसंबर 2025 तक सभी EMRSों में पूर्ण कार्यान्वयन। |
| शिक्षक प्रशिक्षण | शुरुआत में 75 EMRSों के 189 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया, जो छात्रों को मार्गदर्शन देंगे। |
| तकनीकी एकीकरण | लो-कनेक्टिविटी क्षेत्रों के लिए मोबाइल-फ्रेंडली, AI-आधारित टूल्स का उपयोग। |
| मापन | छात्रों की प्रगति ट्रैकिंग के लिए डेटा-आधारित मूल्यांकन। |

महत्व
यह पहल भारत में जनजातीय छात्रों के लिए पहली ऐसी राष्ट्रव्यापी डिजिटल पहल है, जो शिक्षा को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर व्यावहारिक और भावनात्मक विकास पर जोर देती है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है और असमानताओं को कम करने में मदद करेगी। NESTS के कमिश्नर अजीत कुमार श्रीवास्तव ने इसे "जनजातीय छात्रों की पूर्ण क्षमता साकार करने की प्रतिबद्धता" बताया। इससे न केवल छात्रों का व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि देश के समग्र मानव संसाधन में योगदान भी बढ़ेगा।